अरुणाचल
प्रदेश भारत का एक उत्तर–पूर्वी राज्य है। ‘अरुणाचल’ का अर्थ है, ‘उगते
सूरज का पर्वत’। इसकी राजधानी ‘ईटानगर’ है। यहाँ के लोग असमिया और हिन्दी बोलते
हैं। इसके दक्षिण में असम, दक्षिणपूर्व में नागालैंड, पूर्व में म्यांमार, उत्तर
में तिब्बत और पश्चिम में भूटान है।
अंग्रेजी
राज में, अरुणाचल प्रदेश को पूर्वोत्तर सीमांत एजेंसी (नार्थ ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी–नेफा)
कहा जाता था। तब यह असम राज्य का ही हिस्सा था। इसके सामरिक महत्त्व को देखते हुए
सन् 1972 में इसे केन्द्र शासित राज्य का दर्जा मिला और इसका नाम आधिकारिक रूप में
अरुणाचल प्रदेश कर दिया गया। 20 फरवरी, 1987 को इसे भारतीय संघ के 24 वें राज्य के
रूप में मान्यता मिली। वर्ष 1988-89 के दौरान इसे विशेष राज्य का दर्जा दिया गया ।
चारों
ओर से पहाड़ों से
घिरा अरुणाचल पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे बड़ा राज्य है। बीस जिलों वाले इस राज्य में कई तरह के
मौसम एक साथ देखने को मिलते हैं। तिब्बत के निकटवर्ती ऊँचाई वाले क्षेत्रों में
शीत, मध्य हिमालय क्षेत्रों में समशीतोष्ण तथा निचले क्षेत्रों में नम उप
उष्णकटिबंधीय मौसम पाया जाता है। यहाँ औसत से ज्यादा वर्षा होती है।
प्रदेश
के 80% लोगों के जीवनयापन का मुख्य आधार कृषि है। यहाँ के लोग ‘झूम’ खेती करते हैं। यह पहाड़ी लोगों की
पारंपरिक कृषि पद्धति है। अरुणाचल प्रदेश में मुख्य रूप से चावल, मक्का, बाजरा,
गेहूं, जौ, दलहन, गन्ना, अदरक और तिलहन की खेती होती है। टोकरी, प्लाईवुड और मोमबत्ती
निर्माण आदि यहाँ के प्रमुख कुटीर उद्योग हैं।
अरुणाचल
प्रदेश में अनेक दर्शनीय स्थल हैं, जिनमें ईटा दुर्ग के अवशेष, भीष्मक नगर,
परशुराम कुंड और नमदाफा अभ्यारण्य प्रमुख हैं। यहाँ ‘ईटा’ नामक एक प्राचीन एवं
प्रसिद्ध किला है, जिसके नाम पर राज्य की राजधानी का नाम ‘ईटानगर’ पड़ा। इस किले का
निर्माण 14-15वीं शताब्दी में कराया गया था। यहाँ का प्राकृतिक वातावरण मनमोहक है।
यहाँ से कुछ ही दूरी पर ‘गंगा’ नामक एक खूबसूरत झील है। झील से सटे हरे–भरे
जंगल में वन्यजीवों को घूमते हुए आसानी से देखा जा सकता है।
अरुणाचल
प्रदेश में बौद्ध धर्म का अधिक प्रचार है। तवांग का बौद्ध मठ अत्यन्त प्रसिद्ध है।
तिब्बती शैली में बने इस मठ की छत से पूरे ईटानगर का खूबसूरत नजारा देखा जा सकता
है। इस मन्दिर में पं जवाहर लाल नेहरू के नाम से एक संग्रहालय भी मौजूद है, जिसमें
पर्यटक एक जगह पर पूरे अरुणाचल प्रदेश की झलक देख सकते हैं। लकड़ियों से बनी
स्थानीय सुन्दर कलाकृतियों को भी इस संग्रहालय में रखा गया है।
‘पापुम पेर’ यहाँ का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है।
पर्वतीय प्रदेश होने का कारण यहाँ स्थान-स्थान पर सुरम्य पर्वत
शिखर, पहाड़ी नदियां और घने जंगल देखे जा सकते हैं।
परशुराम
कुंड मेला ओर मालीनीयान मेला राज्य के प्रमुख मेले हैं। इस राज्य के प्रमुख
त्योहारों में सी-डोनची, सोलंग, न्योकुम, बूरी-बूट, चालो-लोकु, संगकोन, मोपीन और ओरिआ शामिल हैं।
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