भारत
में प्रकृति के सौंदर्य का अनुपम खजाना है। एक ओर पर्वतराज हिमालय है तो दूसरी ओर
दूर–दूर तक फैला नीला समुद्र। कहीं प्राचीन गुफाएं हैं तो सुरम्य नदियां और झरने।
इस तरह भारत का हर कोना पर्टयन की दृष्टि से समृद्ध है। देश विदेश के पर्यटकों के
लिए भारत एक सुनहरा विकल्प है। पिकनिक के लिए हर साल की तरह इस साल भी इफको परिवार
को घुमाने की योजना बनाई गई। इस वर्ष
पिकनिक के लिए देश का हृदय कहे जाने वाले राज्य मध्यप्रदेश को चुना गया। मार्च माह
के तीसरे सप्ताह में इफको के कर्मचारी और उनके परिवारजन बडी संख्या में पिकनिक के
लिए ट्रेन से रवाना हुए। लगभग 5 दिनों की इस पिकनिक में भोपाल, भोजपुर और पचमढी
भ्रमण का आयोजन किया गया।
भोपाल
में भ्रमण की शुरुआत ‘शौर्य स्मारक’ के साथ हुई, यहाँ देश के वीरों की शौर्य
गाथाएं वर्णित हैं। भूमिगत प्रदर्शनी में तीनों सेनाओं के वीरों के चित्र तथा उनकी बहादुरी का स्वर्णिम इतिहास
चित्रित है। सभी ने यहाँ एक बंद कमरें में सियाचीन जैसे कृत्रिम ठंडे माहौल में
सैनिकों के जीवन का आंशिक अनुभव भी लिया ।
विशाल भूखण्ड पर स्थापित उस स्मारक स्थल में एक चित्रपटल भी बनाया गया है,
जहाँ आजादी की गाथाएं फिल्म रूप में दिखाई गई हैं। सबसे अद्भुत है वहाँ का प्रमुख
शौर्य स्मारक। वह देखने अनूठा है। वस्तुतः वह एक कृत्रिम स्मारक है जो की घुमावदार
मीनार जैसा दिखता है। पिछले वर्ष देश के माननीय प्रधानमंत्री ने इसका उदघाटन कर
इसे देश को समर्पित किया था।
उसके
बाद सभी ‘बडी झील’ की ओर रवाना हुए।
बड़ी झील का विस्तार लगभग छः वर्ग कि.मी. तक है। संध्या काल
में भोपाल नगर का झिलमिलाता प्रतिबिम्ब झील के जल में अद्भुत और मनोरम दृश्य बनाता
है। शाम के समय ‘क्रूज में जलपान तथा
संगीत के साथ झील के भ्रमण’ का आयोजन किया गया था। सभी ने उन अविस्मरणीय पलों का
आनन्द लिया।
उसके
बाद भोपाल से पचमढी की ओर जाते हुए रास्ते में भोजपुर आता है। भोजपुर में प्रसिद्ध
है लभगभ एक हजार साल पुराना भोजेश्वर मंदिर। कहते हैं कि उस मंदिर का निर्माण
तत्कालीन राजा भोज ने करवाया था इसीलिए उसे भोजेश्वर मंदिर कहते हैं। उस मंदिर में
22 फुट ऊंचा एक विशाल शिवलिंग है, जो कि आंशिक रूप से खंडित भी है। उस मंदिर की छत
भी पूरी तरह बनी हुई नहीं है। देखने से लगता है कि किसी विघ्न के कारण वह मन्दिर
पूरा नहीं किया जा सका होगा।
देर
शाम इफको की बसें पचमढी की पहाडियों को पार करते हुए एक होटल में पहुंची , जहाँ २
दिन तक रूकने की व्यवस्था की गई थी । रात के भोजन के दौरान संगीत संध्या का आयोजन
भी किया गया था। अगले दिन पचमढी में प्राचीन गुफाएं दिखाई गई और उसके बाद अप्सरा
विहार का झरना जिस तक के लिए सभी को एक लंबी पदयात्रा करनी पडी।
पिकनिक
का अगला पडाव था घूपगढ, जहाँ जाने के लिए
सभी लोग जीपों में बैठकर निकल पडे। पचमढी की इस सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचने के लिए
सर्पाकार रास्तों से होते हुए पूरा काफिला धूपगढ पहुंचा। पहाडी से दूर–दूर तक फैली
हरियाली के नजारे का सबने लुत्फ उठाया। संध्याकाल के सुरम्य सूर्यास्त को देखने के
लिए सभी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। अन्ततः सभी ने वो दिलकश नजारा कि कैसे सूर्य
नीली गुलाबी रोशनी छिटकता हुआ आसमान के दूसरे छोर में समां गया।
इस
पिकनिक में सभी का खूब मनोरंजन हुआ। सभी कर्मचारियों और उनके परिजनों ने इस अनोखे आयोजन के लिए
आयोजकों को बधाईयां और धन्यवाद दिया।
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