दुनियाभर के भाषा वैज्ञानिक ये मानते हैं कि
संस्कृत सिर्फ एक प्राचीनतम भाषा ही नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक भाषा भी है। गणित,
चिकित्सा शास्त्र, खगोलविज्ञान आदि सभी विषयों के आदि ग्रन्थ इसी भाषा में रचे गए।
भाषविदों का मानना है कि भाषाविज्ञान के समग्र अध्ययन के लिए इस भाषा का ज्ञान
अनिवार्य है।
संस्कृत में अन्य खूबियों के साथ एक खूबी यह भी
है कि संस्कृत संगणक अर्थात् कंप्यूटर के लिए भी उपयुक्त भाषा है। नासा से इसरो तक
सभी वैज्ञानिक इस तथ्य को स्वीकार करते हैं। संस्कृत में ऐसी अनेक खूबियां है, जो
उसकी वैज्ञानिकता प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त हैं। अंग्रेजी आदि भाषाओं में एक
वाक्य में आए हुए शब्दों का स्थान बदल देने
से उस वाक्य का अर्थ बदल जाता है। लेकिन संस्कृत शब्दों को कहीं भी रखा
जाए, कोई फर्क नहीं पडता। वाक्य का अर्थ वही रहता है। यथा– रामः ग्रामं गच्छति
(राम गांव जाता है।) को ग्रामं गच्छति रामः या फिर गच्छति ग्रामं रामः
कहने पर भी अर्थ परिवर्तन नहीं
होता।
संस्कृत के व्याकरण पर शोध करते हुए
भाषाविज्ञानिक इस निष्कर्ष तक भी पहुंच चुके हैं कि हर घर में इस्तेमाल होने वाला
कंप्यूटर पाणिनि की अष्टाध्यायी( संस्कृत व्याकरण) पर ही आधारित है। संगणक
भाषाविदों का मानना है कि कंप्यूटर में इस्तेमाल होने वाली भाषा और इससे बनने वाले
प्रोग्राम में पाणिनि की अनुवृत्ति, अधिकार, संज्ञा और परिभाषा आदि तकनीक ही
प्रयुक्त होती है। सीडैक आदि संस्थाएं इस बारे में गहन शोध कर रही हैं। इस विषय
में अभी भी पर्याप्त शोध की संभावनाएं हैं
ताकि संस्कृत भाषा के महत्त्व को जानकर हम अपने पूर्वजों की विरासत पर गौरव
कर सकें।