Monday, 20 February 2017

नागरीप्रचारिणी सभा

नागरीप्रचारिणी सभा, हिन्दी भाषा और साहित्य का प्रचार और प्रसार करने वाली देश की अग्रणी संस्था है। 1893 में वाराणसी में 'काशी नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना हुई, इसमें भारतेंदु हरिश्चंद्र, महावीर प्रसाद द्विवेदी और रामचंद्र शुक्ल जैसे विद्वानों ने हिन्दी भाषा के सर्वांगीण विकास के लिए बहुत कार्य किया। इनमें कहानीकारों में मुंशी प्रेमचंद प्रमुख थे तो नाटककार के रूप में पंडित जयशंकर प्रसाद अग्रणी । कवियों में ‘हरिऔध’, 'मैथिलीशरण गुप्त', 'सूर्यकांत मणि त्रिपाठी निराला', 'महादेवी वर्मा' आदि प्रमुख थे।
डॉ. श्यामसुदर दास, नागरी प्रचारिणी सभा काशी के तीन संस्थापकों में अन्यतम थे। इस कार्य में उनके सहयोगी पं. राम नारायण मिश्र तथा ठाकुर शिव कुमार सिंह रहे। इस पुनीत कार्य में बाबू गदाधर सिंह ने अपने दुर्लभ ग्रंथों का संग्रह आर्य भाषा पुस्तकालय 'काशी नागरी प्रचारिणी सभा' को सौंप दिया था, जो आज भी इसी नाम से जाना जाता है।
काशी की नागरीप्रचारिणी सभा का ध्यान आरंभ में ही इस बात की ओर गया कि सहस्रों हस्तलिखित हिन्दी पुस्तकें देश के अनेक भागों में, राजपुस्तकालयों तथा लोगों के घरों में अज्ञात पड़ी हैं। अत: सरकार की आर्थिक सहायता से उसने सन् 1900 में पुस्तकों की खोज का काम हाथ में लिया और सन् 1911 तक अपनी खोज में आठ रिपोर्टों में सैकड़ों अज्ञात कवियों तथा ज्ञात कवियों के अज्ञात ग्रंथों का पता लगाया। है।


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